अनगढ़ तरुणाई ।
कुछ लिखना चाहू तो कलम रुक जाती है।
कुछ कहना चाहू तो लफ्ज़ थम जाते है।
लहू सा जम जाता है ह्रदय में॥
कोई हलचल नहीं होती न कोई हरकत।
एक शांत मायूस सा चेहरा
आ जाता है नजरो के सामने
और सब वही रुक जाता है
सब रुक जाता है
कुछ लिखना चाहू तो कलम रुक जाती है।
कुछ कहना चाहू तो लफ्ज़ थम जाते है।
लहू सा जम जाता है ह्रदय में॥
कोई हलचल नहीं होती न कोई हरकत।
एक शांत मायूस सा चेहरा
आ जाता है नजरो के सामने
और सब वही रुक जाता है
सब रुक जाता है
